Jitiya Vrat 2024: Jitiya Vrat एक ऐसा व्रत है, जो भारत के सभी घरों में मनाया जाता है। Jitiya Vrat को बहुत ही लंबे समय से मनाया जा रहा है। Jitiya Vrat महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। Jitiya Vrat को भारत में सभी महीला मनाते हैं। और Jitiya Vrat को महिलाएं भगवान को विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं। जिससे घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। यह Vrat हर साल मनाया जाता है। Jitiya Vrat साल में एक ही बार आते हैं।

Jitiya Vrat हर साल मे एक दिन ही मनाया जाता है, लेकिन इस बार 2024 में Jitiya Vrat दो दिनो का होगा। September माह में बहुत सारे पर्व और त्यौहार मनाया जाता है। जैसे September के शुरुआत में गणेश पुजा मनाया गया था। उसके कर्मा मनाया गया था। इसके बाद विषकर्मा पुजा भी मनाया गया था। और उसके बाद अभि Jitiya Vrat मनाया जा रहा है। Jitiya Vrat को महिलाएं के लिए एक प्रिय पर्व है।

Jitiya Vrat क्यों मनाया जाता है।

दुनिया में एक ऐसा हिन्दू धर्म है, जिसमें महिलाओं को देवी के रुप में मान्यता मिली है। Jitiya Vrat महिलाओं के लिए बहुत ही सुन्दर पर्व है। सनातन धर्म में सभी पर्व, त्यौहार और व्रत का महत्त्व बताया गया है। इसी प्रकार एक जितिया व्रत है, जो 24 September को मनाया जाएगा।

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Jitiya Vrat 2024 मे दो दिनों का होगा।

इस साल 2024 में Jitiya Vrat दो दिनो का होगा। पहला मिथिला पंचांग के अनुसार Jitiya Vrat को 24 सितंबर को रखेंगे। उसके बाद 25 सितंबर की शाम को पारण करेंगे। और दूसरा व्रत बनारसी पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को व्रत रखा जाएगा। और उसके अगले दिन 26 सितंबर की सुबह को पारण किया जाएगा।

Jitiya Vrat 2024 की संपूर्ण पूजा विधि।

जितिया व्रत रखने वाली सभी माताओं बहनों को जितिया व्रत की ढेर सारी शुभकामनाएं। आपकी जितिया व्रत की पूजा को और अधिक शुभ बनाने के लिए , मैं आपके लिए लेकर आई हूँ , जितिया व्रत की संपूर्ण पूजा विधि। जितिया व्रत पर्व के रूप में मनाया जाता है। और इस पर्व को पूरे तीन दिनों तक मनाया जाता है। जितिया व्रत का पहला दिन सप्तमी तिथि होता है।

जिसे नहाय खाय के रूप में मनाते हैं। अष्टमी तिथि को खुद जितिया के नाम से भी जाना जाता है। और इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। और फिर नवमी तिथि को शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण किया जाता है। हर साल आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को जितिया व्रत या फिर जीमूतवाहन व्रत के नाम से भी जाना जाता है।

Jitiya Vrat का सही समय क्या है।

इस बार साल 2024 में 24 सितंबर मंगलवार को नहाय खाय का पर्व रहेगा और साथ ही निर्जला व्रत रखा जाएगा। 25 सितंबर बुधवार को और व्रत का पारण किया जाएगा। 26 सितंबर दिन गुरुवार को आप जानते हैं, इस दिन पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में पच्चीस सितंबर बुधवार को सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।

शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 14 मिनट से 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। व्रत का पारण किया जाएगा, 26 सितंबर दिन गुरुवार को सुबह 6 बजकर 21 मिनट से 8 बजकर 23 मिनट के बीच में सबके अलग अलग मान्यताएं होती है। इसलिए आपके यहां पर जिस पर परंपरा का पालन किया जाता हो। जिस तरह के पकवान अर्पित की जाती है। आप उन्हीं को पूजा में प्रयोग करें।

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Jitiya Vrat का पुजा सामाग्री।

अब सबसे पहले इस पुजा मे प्रयोग की जाने वाली पूजन सामग्री के बारे में जान लेते हैं। तो इस व्रत में आपको गणना ,कुशा ,जेएनयू ,सिंदूर, रोली ,मौली, अक्षत, धूप दीप, कपूर , कच्चा दूध ,बांस की डलिया , लौकिक फूल माला। प्रसाद के लिए मौसमी फल ,भीगे चने के राव और बताशे या घर में बनेगा प्रसाद जैसे ठीकव ,हलवा पूरी ,पाँच सुपारी ,दक्षिणा खिलौने ,नेनुआ । यह तो पत्ते, गोबर और मिट्टी से बनी झील और सिया राम की प्रतिमा की आपको पूजा के लिए आवश्यकता होगी।

Jitiya Vrat की पूजा कैसे की जाती है।

अब किस प्रकार से पूजा करनी है यह भी जान लीजिए। जितिया व्रत के पहले दिन यानी नहाय खाय को सूर्यास्त के बाद कुछ भी नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से व्रत खंडित हो जाता है। और इसका फिर दुष्प्रभाव संतान को भी झेलना पड़ सकता है। नहाय खाय के दिन व्रती महिलाएं और उनके परिवारजनों को खाने में लहसुन प्याज नहीं डालना चाहिए। ऐसा भोजन तामसिक माना जाता है। व्रत के दिन तामसिक भोजन न तो करना चाहिए। और ना ही खुद खाना चाहिए। इस दिन गलती से भी नाखून पालना काटे ध्यान रखें कि परिवार में कोई भी व्यक्ति मांस मदिरा का सेवन न करें।

ऐसा करने से देवी देवता क्रोधित होते हैं। और परिणाम के रूप में संतान को कष्ट भुगतना होता है। व्रत में झूठ बोलने से बचना चाहिए। सप्तमी से लेकर नवमी तिथि तक क्रोध या फिर किसी तरह की हिंसा नहीं करनी चाहिए। किसी प्रकार की निंदा चुगली बुराई नहीं करनी चाहिए व्रत के दिन यानि खुद जितिया के दिन सुबह उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत हो जाए।

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व्रत का संकल्प लेते हुए अपनी संतान की लंबी आयु सुरक्षा और उन्नति की कामना करें। यदि संतान प्राप्ति की कामना से आप इस व्रत को रख रही है ,तो आपको संतान प्राप्ति की कामना के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। वैसे तो यह पूजा जो है, वो किसी नदी या जलाशय यह किसी तलाब या पोखर के किनारे की जाती है। अगर आप घर में पूजा कर रही है, तो पूजा वाली जगह को अच्छे से साफ जरूर कर लें।

गंगाजल छिड़क कर लें या गाय के गोबर से लीप लें इसके बाद पूजा करने के लिए आप एक चौके की स्थापना करें। इस चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। उसके ऊपर अक्षत से अष्टदल बनाएं। अष्टदल कमल के ऊपर आप कलश की स्थापना करें। इस दिन कलश की स्थापना जरूर करनी चाहिए। अष्टदल यानी आठ दलिया आठ पत्ते वाले कमल की आकृति होती है। आप चावल से या पुष्पों से भी अष्टदल बना सकते हैं।

अब कलश की स्थापना करते समय कोई भी मिट्टी का धातु का आप कलश ले लें जिसके मुख पर आपको मौली पाटनी है। कलश पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं अब कलश के अंदर जल गंगाजल सुपारी हल्दी की गांठ एक सिक्का और थोड़े अक्षत पुष्प डाले कलश के मुख को आम के पत्तों से धरती यानी उसके ऊपर जैसे हम बारात के ही दिनों में कलश की स्थापना करते हैं।

आम या अशोक के पत्ते जितने आपको मिले पाँच सात या नौ उन्हें आपको रखना चाहिए। उसके ऊपर आप एक कटोरी में अक्षत गेहूं रखे जिसके ऊपर आपको नारियल रखना होता है। नारियल पानी वाला होना चाहिए। और नारियल को आप लिटाकर रखें नारियल का वह हिस्सा जो टहनी से जुड़ा होता है। वह आपकी खुद की तरफ होना चाहिए इस बात का ध्यान रखें।

अगर आप नारियल की स्थापना नहीं कर रहे हैं ,तो आप जिस वक्त नारियल रखा जाता है उस जगह पर आते जलता हुआ दीपक भी रख सकते हैं जिससे दीप कलश कहते हैं।

 

 

     
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