Navratri 2024: नवरात्रि त्यौहार हर साल मनाया जाता है। नवरात्रि त्यौहार को नौ दिवसीय त्यौहार से भी जाना जाता है। इस त्यौहार को नौ दिनो तक मनाया जाता है। जो दिव्य स्त्री का पुजा नौ दिनो तक होता है। इस देवी का नाम – मां दुर्गा शक्ति है। मां दुर्गा के नौ रूप है। और नौ रूप में हर एक दिन एक रुप का पुजा किया जाता है। और मां दुर्गा के नौ रूप को अलग – अलग रंगो से चिह्नित किया जाता है।
साथ ही में अलग – अलग गुणों को भी दर्शाती हैं। दुनिया में सिर्फ एक ऐसा ही सनातन धर्म है, जो स्त्री को देवी के रुप में पुजा जाता है। इस लेख में प्रत्येक रंग के महत्त्व को जानकारी और गुणों पर प्रकाश डाला गया है। जिसे आपकों पता चल जाएगा, कि कौन सी देवी किस रंग के प्रति और किस दिन किस देवी का पुजा किया जाता है। आज देवी का चौथ रूप है, आइए मां दुर्गा देवी के नौ रूपों के बारे में जानें।
नवरात्रि 2024 मे प्रत्येक रंग का महत्व जानें।
| Day | Date | Navratri Colour | Goddess Name | Significance |
|---|---|---|---|---|
| 1. | 3 अक्टूबर | पीला | देवी शैलपुत्री | खुशी, चमक और ऊर्जा का प्रतीक है। |
| 2. | 4 अक्टूबर | हरा | देवी ब्रह्मचारिणी | विकास, सद्भाव और नई शुरुआत का प्रतिनिधित्व करता है। |
| 3. | 5 अक्टूबर | grey | देवी चंद्रघंटा स्थिरता | स्थिरता और शक्ति को दर्शाता है. |
| 4. | 6 अक्टूबर | नारंगी | देवी कुष्मांडा | उत्साह, गर्मजोशी और ऊर्जा का प्रतीक है। |
| 5. | 7 अक्टूबर | सफ़ेद | देवी स्कंदमाता | शांति और पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है. |
| 6. | 8 अक्टूबर | लाल | देवी कात्यायनी | शक्ति और जुनून का रंग. |
| 7. | 9 अक्टूबर | शाही नीला | देवी कालरात्रि | राजसी ठाठ, शान और धन का प्रतिनिधित्व करता है। |
| 8. | 10 अक्टूबर | गुलाबी | देवी महागौरी | करुणा, सद्भाव और प्रेम का प्रतीक है। |
| 9. | 11 अक्टूबर | बैंगनी | देवी सिद्धिदात्री | आध्यात्मिकता, महत्वाकांक्षा और समृद्धि को दर्शाता है। |
पहला दिन (पीला )

इससे जुड़ी जानकारी
- नवरात्रि 2024 मे प्रत्येक रंग का महत्व जानें।
- पहला दिन (पीला )
- दूसरा दिन (हरा)
- दिन 3 (ग्रे )
- दिन 4 (नारंगी)
- दिन 5 (सफ़ेद)
- दिन 6 (लाल)
- दिन 7 (रॉयल ब्लू)
- दिन 8 (गुलाबी)
- दिन 9 (बैंगनी)
- मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र
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नवरात्रि के पहले दिन ही पीला रंग देवी शैलपुत्री को समर्पित है। पीला रंग का महत्त्व खुशी, सकारात्मकता और सीखने का प्रतीक माना गया है। त्यौहार के शुरुआती रंग के रूप में, यह नवरात्रि में आने वाले दिनों के लिए एक खुशनुमा और ज्ञानवर्धक माहौल तैयार करता है। जिसे लोगो को बहुत ही अच्छी लगती है। और सभी लोग बहुत ही खुश होते हैं।
मां शैलपुत्री के मंत्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
-वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
देवी शैलपुत्री का प्रार्थना मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल पर सवार।
करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।।
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
दूसरा दिन (हरा)

नवरात्रि के दूसरे दिन हरा रंग देवी ब्रह्मचारिणी से जुड़ा होता है। यह हरा रंग एक नई शुरुआत, विकास और उर्वरता का प्रतीक माना गया है, जो त्योहार के दौरान भक्तों के लिए समृद्धि और नई शुरुआत जो लोगे को बहुत ही प्रोत्साहित करता है।
देवी ब्रह्मचारिणी के मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥ ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
देवी ब्रह्मचारिणी का प्रार्थना मंत्र
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ दधाना कारा पद्मभ्यमक्षमाला कमण्डलु। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
देवी ब्रह्मचारिणी का स्तुति का पाठ
मां ब्रह्मचारिणी की कृपा पाने के लिए स्तुति (स्तुति का भजन) का जाप किया जा सकता है:
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
vijayadashami 2024: दुर्गा पूजा कब से शुरू है।
दिन 3 (ग्रे )

नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा को समर्पित है , और तीसरा दिन ग्रे रंग से चिह्नित है। यह ग्रे रंग को संतुलन, स्थिरता और आंतरिक शांति की इच्छा को दर्शाता है, जो नकारात्मकता शक्तियों को दूर करने और जीवन में शांति को बढ़ावा देने में बहुत ही मदद करती है।
मां चंद्रघंटा का ध्यान मंत्र (Maa Chandraghanta Mantra)
पिंडजप्रवरारूढ़ा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।
माता चंद्रघंटा आरती (Maa Chandraghanta Aaarti)
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।
दिन 4 (नारंगी)

नवरात्रि के चौथे दिन नारंगी रंग, देवी कुष्मांडा को समर्पित है। यह नारंगी रंग गर्मजोशी, उत्साह और रचनात्मकता का प्रतीक माना गया है, जो उत्सव को सकारात्मकता और ऊर्जा से भर देता है।
मां कूष्मांडा की स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां कूष्मांडा की प्रार्थना
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
मां कूष्मांडा बीज मंत्र
ऐं ह्री देव्यै नम:
मां कूष्मांडा की आरती (Maa Kushmanda Ki Aarti)
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे।
सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
दिन 5 (सफ़ेद)

नवरात्रि के पांचमा दिन सफ़ेद रंग, जो देवी स्कंदमाता को समर्पित है। यह सफ़ेद रंग पवित्रता, शांति और स्थिरता का प्रतीक माना गया है, जो भक्तों में दिव्य आशीर्वाद और शांति की भावना को आमंत्रित करता है।
स्कंदमाता का पूजन मंत्र
या देवी सर्वभूतेषू मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कंद माता पांचवा नाम तुम्हारा आता,
सब के मन की जानन हारी जग जननी सब की महतारी
तेरी ज्योत जलाता रहू मैं, हरदम तुम्हे ध्याता रहू मैं
कई नामों से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा
कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शेहरो में तेरा बसेरा
हर मंदिर में तेरे नजारे, गुण गाये तेरे भगत प्यारे
भगति अपनी मुझे दिला दो, शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इन्दर आदी देवता मिल सारे, करें पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये, तुम ही खंडा हाथ उठाये
दासो को सदा बचाने आई, ‘चमन’ की आस पुजाने आई
दिन 6 (लाल)

नवरात्रि के छठा दिन को लाल रंग से सजाया जाता है, जो देवी कात्यायनी का प्रतीक माना जाता है। यह लाल रंग को शक्ति, ताकत और जुनून का प्रतीक माना गया है। यह भक्ति की भावना को तीव्र करता है, जो प्रेम और श्रद्धा की प्रबल भावनाओं को जगाता है।
मां कात्यायनी स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
मां कात्यायनी की आरती
जय-जय अम्बे जय कात्यायनी
जय जगमाता जग की महारानी
बैजनाथ स्थान तुम्हारा
वहा वरदाती नाम पुकारा
कई नाम है कई धाम है
यह स्थान भी तो सुखधाम है
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी
हर जगह उत्सव होते रहते
हर मंदिर में भगत हैं कहते
कत्यानी रक्षक काया की
ग्रंथि काटे मोह माया की
झूठे मोह से छुडाने वाली
अपना नाम जपाने वाली
बृहस्पतिवार को पूजा करिए
ध्यान कात्यायनी का धरिए
हर संकट को दूर करेगी
भंडारे भरपूर करेगी
जो भी मां को ‘चमन’ पुकारे
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।
दिन 7 (रॉयल ब्लू)

नवरात्रि के सातमा दिन को रॉयल ब्लू दिन , जो देवी कालरात्रि से जुड़ा है। यह समृद्ध रंग लालित्य, राजसीपन और शांति का प्रतीक है, माना जाता है ,कि यह सुरक्षा प्रदान करते हुए स्वास्थ्य और धन को बढ़ाता है।
मां कालरात्रि बीज मंत्र
क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:.
मां कालरात्रि मंत्र (maa Kalratri mantra)
दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे।
चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम ।
मां कालरात्रि की आरती (maa kalratri aarti)
कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।
काल के मुह से बचाने वाली ॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।
महाचंडी तेरा अवतार ॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा ।
महाकाली है तेरा पसारा ॥
खडग खप्पर रखने वाली ।
दुष्टों का लहू चखने वाली ॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।
सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥
सभी देवता सब नर-नारी ।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी ।
ना कोई गम ना संकट भारी ॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें ।
महाकाली मां जिसे बचावे ॥
तू भी भक्त प्रेम से कह ।
कालरात्रि मां तेरी जय ॥
दिन 8 (गुलाबी)

नवरात्रि के आठ्मा दिन को गुलाबी रंग, जो देवी महागौरी को समर्पित होता है। यह गुलाबी रंग प्रेम, करुणा और सद्भाव का प्रतीक माना गया है, जो भावनात्मक संबंधों को बढ़ावा देता है और रिश्तों को पोषित करता है।
मां महागौरी मंत्र
मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
मां महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया ।
जय उमा भवानी जय महामाया ॥
हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहा निवास ॥
चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥
भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता ॥
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥
सती ‘सत’ हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥
बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता
माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥
‘चमन’ बोलो तो सोच तुम क्या रहे होम
हागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो ॥
दिन 9 (बैंगनी)

नवरात्रि के अन्तिम दिन को बैंगनी रंग , जो देवी सिद्धिदात्री को समर्पित है। यह बैंगनी रंग आध्यात्मिकता, महत्वाकांक्षा और समृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है, माना जाता है ,कि यह दिव्य ऊर्जा का आह्वान करता है और भक्तों को उनके आध्यात्मिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है।
मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।
तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।
जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।
तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।
तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।
तू सब काज उसके करती है पूरे।
कभी काम उसके रहे ना अधूरे।
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।
रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।
भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।
ये सभी जीवंत रंग है, और नवरात्रि महोत्सव के दृश्य को और सुंदर और आकर्षक बना
ता है। साथ ही देवी मां के द्वारा इस जीवंत रंग से सन्निहित विशिष्ट गुणों की याद भी दिलाती है। रंग और वे जिन देवियों ने रंग का प्रतिनिधित्व करते हैं , और भक्तो को प्रेम, शक्ति, शांति और समृद्धि जैसे गुणों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। जिससे नवरात्रि एक भव्य और आध्यात्मिक यात्रा के साथ – साथ लोगो को सुख, शांति का अनुभव होता है।



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